ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 5959.20वाल्मीकि रामायण 59.20पश्यन् दाशरथेः भार्याम् रामस्य जनक आत्मजाम् । भ्रष्ट आभरण कौशेयाम् शोक वेग पराजिताम् ॥४-५९-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय