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वाल्मीकि रामायण 58.20

इतो द्वीपे समुद्रस्य संपूर्णे शत योजने ।
तस्मिन् लंका पुरी रम्या निर्मिता विश्वकर्मणा ॥४-५८-२०॥

पूरा अध्याय