ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 5858.15वाल्मीकि रामायण 58.15तरुणी रूप संपन्ना सर्व आभरण भूषिता । ह्रियमाणा मया दृष्टा रावणेन दुरात्मना ॥४-५८-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय