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वाल्मीकि रामायण 56.2

सांपातिः नाम नाम्ना तु चिर जीवी विहंगमः ।
भ्राता जटायुषः श्रीमान् प्रख्यात बल पौरुषः ॥४-५६-२॥

पूरा अध्याय