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वाल्मीकि रामायण 55.15

मातरम् चैव मे ताराम् आश्वासयितुम् अर्हथ ।
प्रकृत्या प्रिय पुत्रा सा सानुक्रोशा तपस्विनी ॥४-५५-१५॥

पूरा अध्याय