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वाल्मीकि रामायण 54.9

नित्यम् अस्थिर चित्ता हि कपयो हरि पुंगव ।
न आज्ञाप्यम् विषहिष्यन्ति पुत्र दारान् विना त्वया ॥४-५४-९॥

पूरा अध्याय