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वाल्मीकि रामायण 54.3

आपूर्यमाणम् शश्वत् च तेजो बल पराक्रमैः ।
शशिनम् शुक्ल पक्ष आदौ वर्धमानम् इव श्रिया ॥४-५४-३॥

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