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वाल्मीकि रामायण 53.7

स तु सिंह ऋषभ स्कंधः पीन आयत भुजः कपिः ।
युवराजो महाप्राज्ञ अंगदो वाक्यम् अब्रवीत् ॥४-५३-७॥

पूरा अध्याय