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वाल्मीकि रामायण 52.29

सहसा पिदधुः दृष्टिम् हृष्टा गमन कान्क्षिणः ।
वानराः तु महात्मानो हस्त रुद्ध मुखाः तदा ॥४-५२-२९॥

पूरा अध्याय