ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 5151.17वाल्मीकि रामायण 51.17इदम् रक्षामि भवनम् हेमाया वानरोत्तम । मम प्रिय सखी हेमा नृत्त गीत विशारदा ॥४-५१-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय