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वाल्मीकि रामायण 50.31

तपनीय गवाक्षाणि मुक्ता जाल आवृतानि च ।
हैम राजत भौमानि वैदूर्य मणिमन्ति च ॥४-५०-३१॥

पूरा अध्याय