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वाल्मीकि रामायण 50.12

अभ्यपद्यन्त संहृष्टाः तेजोवन्तो महाबलाः ।
नाना सत्त्व समाकीर्णाम् दैत्य इन्द्र निलय उपमम् ॥४-५०-१२॥

पूरा अध्याय