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वाल्मीकि रामायण 49.11

अंगदस्य वचः श्रुत्वा वचनम् गंधमादनः ।
उवाच व्यक्तया वाचा पिपासा श्रम खिन्नया ॥४-४९-११॥

पूरा अध्याय