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वाल्मीकि रामायण 48.9

यत्र वन्ध्य फला वृक्षा विपुष्पाः पर्ण वर्जिताः ।
निस्तोयाः सरितो यत्र मूलम् यत्र सुदुर्लभम् ॥४-४८-९॥

पूरा अध्याय