ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 4848.18वाल्मीकि रामायण 48.18ददृशुः भीम कर्माणम् असुरम् सुर निर्भयम् । तम् दृष्ट्वा वनरा घोरम् स्थितम् शैलम् इव असुरम् ॥४-४८-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय