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वाल्मीकि रामायण 46.3

यदा तु दुंदुभिम् नाम दानवम् महिष आकृतिम् ।
परिकालयते वाली मलयम् प्रति पर्वतम् ॥४-४६-३॥

पूरा अध्याय