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वाल्मीकि रामायण 43.51

गीत वादित्र निर्घोषः स उत्कृष्ट हसित स्वनः ।
श्रूयते सततम् तत्र सर्व भूत मनोरमः ॥४-४३-५१॥

पूरा अध्याय