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वाल्मीकि रामायण 43.3

वृतः शत सहस्रेण त्वत् विधानाम् वन ओकसाम् ।
वैवस्वत सुतैः सार्धम् प्रविष्ठ सर्व मंत्रिभिः ॥४-४३-३॥

पूरा अध्याय