ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 4343.17वाल्मीकि रामायण 43.17ततो देवसखो नाम पर्वतः पतग आलय । नाना पक्षि समाकीर्णो विविध द्रुम भूषितः ॥४-४३-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय