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वाल्मीकि रामायण 42.7

स्फीतान् जन पदान् रम्यान् विपुलानि पुराणि च ।
पुंनाग गहनम् कुक्षिम् वकुल उद्दालक आकुलम् ॥४-४२-७॥

पूरा अध्याय