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वाल्मीकि रामायण 42.49

प्रष्टव्यो मेरुसावर्णिः महर्षिः सूर्य संनिभः ।
प्रणम्य शिरसा भूमौ प्रवृत्तिम् मैथिलीम् प्रति ॥४-४२-४९॥

पूरा अध्याय