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वाल्मीकि रामायण 41.42

रोहिता नाम गंधर्वा घोरम् रक्षन्ति तद् वनम् ।
तत्र गंधर्व पतयः पंच सूर्य सम प्रभाः ॥४-४१-४२॥

पूरा अध्याय