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वाल्मीकि रामायण 41.2

नीलम् अग्नि सुतम् चैव हनूमन्तम् च वानरम् ।
पितामह सुतम् चैव जांबवंतम् महोजसम् ॥४-४१-२॥

पूरा अध्याय