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वाल्मीकि रामायण 41.16

द्रक्ष्यथ आदित्य संकाशम् अगस्त्यम् ऋषि सत्तमम् ।
ततः तेन अभ्यनुज्ञाताः प्रसन्नेन महात्मना ॥४-४१-१६॥

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