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वाल्मीकि रामायण 35.7

घृताच्याम् किल संसक्तो दश वर्षाणि लक्ष्मण ।
अहो अमन्यत धर्मात्मा विश्वामित्रो महामुनिः ॥४-३५-७॥

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