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वाल्मीकि रामायण 34.7

सत्त्व अभिजन संपन्नः स अनुक्रोशो जितेन्द्रियः ।
कृतज्ञः सत्य वादी च राजा लोके महीयते ॥४-३४-७॥

पूरा अध्याय