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वाल्मीकि रामायण 33.61

तत् आगच्छ महाबाहो चारित्रम् रक्षितम् त्वया ।
अच्छलम् मित्र भावेन सताम् दरा अवलोकनम् ॥४-३३-६१॥

पूरा अध्याय