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वाल्मीकि रामायण 33.56

तम् काम वृत्तम् मम सन्निकृष्टम्काम अभियोगात् च विमुक्त लज्जम् ।
क्षमस्व तावत् पर वीर हन्तःतव भ्रातर्म वानर वंश नाथम् ॥४-३३-५६॥

पूरा अध्याय