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वाल्मीकि रामायण 33.37

त्वया स्वांत्वैः उपक्रांतम् प्रसन्न इन्द्रिय मानसम् ।
ततः कमलपत्राक्षम् द्रक्ष्याअमि अहम् अरिंदमम् ॥४-३३-३७॥

पूरा अध्याय