ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3333.23वाल्मीकि रामायण 33.23दृष्ट्वा अभिजन संपन्नाः तत्र माल्य कृत स्रजः । वर माल्य कृत व्यग्रा भूषण उत्तम भूषिताः ॥४-३३-२३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय