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वाल्मीकि रामायण 33.19

स सप्त कक्ष्या धर्मात्मा यान आसन समावृताः ।
प्रविश्य सुमहत् गुप्तम् ददर्श अंतःपुरम् महत् ॥४-३३-१९॥

पूरा अध्याय