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वाल्मीकि रामायण 33.14

पाण्डुरेण तु शैलेन परिक्षिप्तम् दुरासदम् ।
वानरेन्द्र गृहम् रम्यम् महेन्द्र सदन उपमम् ॥४-३३-१४॥

पूरा अध्याय