ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3232.13वाल्मीकि रामायण 32.13त्वम् प्रमत्तो न जानीषे कालम् कलविदाम् वर । फुल्ल सप्त च्छद श्यामा प्रवृत्ता तु शरत् शिवा ॥४-३२-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय