वाल्मीकि रामायण 31.5
तम् आत्त बाण आसनम् उत्पतंतम्निवेदित अर्थम् रण चण्ड कोपम् ।
उवच रामः पर वीर हन्तास्व वेक्षितम् स अनुनयम् च वाक्यम् ॥४-३१-५॥
तम् आत्त बाण आसनम् उत्पतंतम्निवेदित अर्थम् रण चण्ड कोपम् ।
उवच रामः पर वीर हन्तास्व वेक्षितम् स अनुनयम् च वाक्यम् ॥४-३१-५॥