ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3131.41वाल्मीकि रामायण 31.41तेन शब्देन महता प्रत्यबुध्यत वानरः । मद विह्वल ताम्राक्षो व्याकुल स्रग्वि भूषणः ॥४-३१-४१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय