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वाल्मीकि रामायण 31.23

ततः सचिव संदिष्टा हरयो रोमहर्षणाः ।
गिरि कुंजर मेघ आभा नगर्या निर्ययुः तदा ॥४-३१-२३॥

पूरा अध्याय