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वाल्मीकि रामायण 30.9

या पुरा कलहंसानाम् स्वरेण कल भाषिणी ।
बुध्यते चारु सर्वांगी सा अद्य मे रमते कथम् ॥४-३०-९॥

पूरा अध्याय