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वाल्मीकि रामायण 30.84

स पूर्वजम् तीव्र विवृद्ध कोपम्लालप्यमानम् प्रसमीक्ष्य दीनम् ।
चकार तीव्राम् मतिम् उग्र तेजाहरीश्वरे मानव वंश वर्थनः ॥४-३०-८४॥

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