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वाल्मीकि रामायण 30.58

प्रसन्न सलिलाः सौम्य कुरराभिः विनादिताः ।
चक्रवाक गण आकीर्णा विभांति सलिल आशयाः ॥४-३०-५८॥

पूरा अध्याय