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वाल्मीकि रामायण 30.5

दृष्ट्वा च विमलम् व्योम गत विद्युत् बलाहकम् ।
सारस आरव संघुष्टम् विललाप आर्तया गिरा ॥४-३०-५॥

पूरा अध्याय