Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 30.32

नभः समीक्ष्या अंबु धरैः विमुक्तम्विमुक्त बर्ह आभरणा वनेषु ।
प्रियासु अरक्ता विनिवृत्त शोभागत उत्सवा ध्यान परा मयूराः ॥४-३०-३२॥

पूरा अध्याय