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वाल्मीकि रामायण 30.20

अथ पद्म पलाश अक्षीम् मैथिलीम् अनुचिन्तयन् ।
उवाच लक्ष्मणम् रामो मुखेन परिशुष्यता ॥४-३०-२०॥

पूरा अध्याय