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वाल्मीकि रामायण 30.2

पाण्डुरम् गगनम् दृष्ट्वा विमलम् चन्द्र मण्डलम् ।
शारदीम् रजनीम् चैव दृष्ट्वा ज्योत्स्न अनुलेपनाम् ॥४-३०-२॥

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