ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 3030.13वाल्मीकि रामायण 30.13एवम् आदि नरश्रेष्ठो विललाप नृपात्मजः । विहंग इव सारंगः सलिलम् त्रिदशेश्वरात् ॥४-३०-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय