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वाल्मीकि रामायण 3.9

सिंह विप्रेक्षितौ वीरौ महाबल पराक्रमौ ।
शक्र चाप निभे चापे गृहीत्वा शत्रु नाशनौ ॥४-३-९॥

पूरा अध्याय