ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 33.5वाल्मीकि रामायण 3.5उवाच कामतो वाक्यम् मृदु सत्य पराक्रमौ । राजर्षि देव प्रतिमौ तापसौ संशित व्रतौ ॥४-३-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय