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वाल्मीकि रामायण 3.5

उवाच कामतो वाक्यम् मृदु सत्य पराक्रमौ ।
राजर्षि देव प्रतिमौ तापसौ संशित व्रतौ ॥४-३-५॥

पूरा अध्याय