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वाल्मीकि रामायण 3.31

अविस्तरम् असंदिग्धम् अविलम्बितम् अव्यथम् ।
उरःस्थम् कण्ठगम् वाक्यम् वर्तते मध्यमे स्वरम् ॥४-३-३१॥

पूरा अध्याय