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वाल्मीकि रामायण 3.18

जीवित अन्तकरैः घोरैः ज्वलद्भिः इव पन्नगैः ।
महा प्रमाणौ विपुलौ तप्त हाटक भूषणौ ॥४-३-१८॥

पूरा अध्याय