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वाल्मीकि रामायण 3.16

स सागर वनाम् कृत्स्नाम् विन्ध्य मेरु विभूषिताम् ।
इमे च धनुषी चित्रे श्लक्ष्णे चित्र अनुलेपने ॥४-३-१६॥

पूरा अध्याय