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वाल्मीकि रामायण 29.2

समृद्ध अर्थम् च सुग्रीवम् मन्द धर्मार्थ संग्रहम् ।
अत्यर्थम् च असताम् मार्गम् एकांत गत मानसम् ॥४-२९-२॥

पूरा अध्याय